चमकी बुखार में क्या होता है?HealthPlanet

Posted on Thu 1st Dec 2022 : 15:59

क्या है चमकी बुखार? लक्षण
चमकी बुखार में वास्तव में बच्चों के खून में सुगर और सोडियम की कमी हो जाती है. सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो सकती है.​
मीठी लीची के लिए प्रसिद्ध बिहार का मुजफ्फरपुर इन दिनों कुछ और वजह से समाचारों में है. इस साल मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार से अब तक 100 बच्चों का निधन हो चुका है. साल 1995 से ही यह रहस्यमय बीमारी यहां के बच्चों को अपना शिकार बनाती आई है. पिछले दो दशक में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की वजह से देश में 5000 से अधिक बच्चों की मौत हो चुकी है.

हर साल मई और जून के महीने में बिहार के अलग-अलग कस्बे के बच्चे इस बीमारी की चपेट में आते हैं और बच्चों के मरने का सिलसिला शुरू हो जाता है. बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और डॉक्टरों की असंवेदनशीलता ने पीड़ित बच्चों के परिजनों को और परेशान किया है. 1 से 15 साल की उम्र के बच्‍चे इस बीमारी से ज्‍यादा प्रभावित होते हैं

चमकी बुखार वास्तव में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस ) है. इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है. यह इतनी खतरनाक और रहस्यमयी बीमारी है कि अभी तक विशेषज्ञ भी इसकी सही-सही वजह का पता नहीं लगा पाए हैं. चमकी बुखार में वास्तव में बच्चों के खून में सुगर और सोडियम की कमी हो जाती है. सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो सकती है.गर्मियों में तेज धूप और पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इस वजह से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, थकान, लकवा, मिर्गी, भूख में कमी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं. चमकी बुखार के लक्षण भी ऐसे ही हैं.

यह बीमारी शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. बहुत ज्यादा गर्मी एवं नमी के मौसम में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है. इस मौसम में इसकी तीव्रता भी काफी बढ़ जाती है.कैसे काम करते हैं चमकी बुखार के वायरस?
इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क से जुड़ी बीमारी है. हमारे मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं. इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं. जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है, तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं.

यह एक संक्रामक बीमारी है. चमकी बुखार के वायरस जब शरीर में पहुंचते हैं और खून में शामिल हो जाते हैं, तो इनका प्रजनन शुरू हो जाता है. इसके बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ने लगती है.

खून के साथ बहकर बीमारी ये वायरस मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं. मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन का कारण बनते हैं और शरीर के 'सेंट्रल नर्वस सिस्टम' को खराब कर देते हैं.क्या हैं चमकी बुखार के लक्षण?

चमकी नाम की बीमारी में शुरुआत में तेज बुखार आता है.
इसके बाद बच्चों के शरीर में ऐंठन शुरू हो जाती है.
इसके बाद तंत्रिका तंत्र काम करना बंद कर देता है.
इस बीमारी में ब्लड शुगर लो हो जाता है.
बच्चे तेज बुखार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उन्हें दौरे भी पड़ने लगते हैं.
जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं.
बुखार के साथ ही घबराहट भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है.
अगर बुखार के पीड़ित को सही वक्त पर इलाज नहीं मिलता है तो मौत तय है.

अगर चमकी बुखार हो जाए तो क्या करें?

बच्चों को पानी पिलाते रहे, इससे उन्हें हाइड्रेट रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी.
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें.
पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पट्टी लगायें ताकि बुखार कम हो सके.
बच्‍चे के शरीर से कपड़े हटा लें एवं उसकी गर्दन सीधी रखें.
बच्चों को पारासिटामोल की गोली व अन्‍य सीरप डॉक्‍टर की सलाह के बाद ही दें.
अगर बच्चे के मुंह से लार या झाग निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिक्‍कत न हो.
बच्‍चों को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें.
तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंख को पट्टी से ढंक दें.

बेहोशी व दौरे आने की अवस्‍था में मरीज को हवादार जगह पर लिटाएं.
चमकी बुखार की स्थिति में मरीज को बाएं या दाएं करवट लिटाकर डॉक्टर के पास ले जाएं.
अगर आपके बच्चे में चमकी बीमारी के लक्षण दिखें तो

सबसे पहले बच्चे को धूप में जाने से रोकें.
बच्चा तेज धूप के संपर्क में आया तो उसे डिहाईड्रेशन की समस्या होगी, जिससे बीमारी की गंभीरता बढ़ती है.
बच्‍चों को दिन में दो बार स्‍नान कराएं.
गर्मी के समय बच्‍चों को ओआरएस अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाएं.
रात में बच्‍चों को भरपेट खाना खिलाकर ही सुलाएं.

चीनी-नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करें.

इंसेफ्लाइटिस एक संक्रामक बीमारी है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकती है. किसी व्यक्ति के इस बीमारी के संक्रमित हो जाने के बाद उसके मल-मूत्र, थूक, छींक आदि (शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ) के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति में भी इंसेफ्लाइटिस के वायरस पहुंच सकते हैं.

इंसेफ्लाइटिस का ही एक रूप है जापानी बुखार, जो मच्छरों के कारण फैलता है. एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम से बचाव के लिए आपको अपने घर के आसपास सफाई रखनी चाहिए.

चमकी बुखार के लक्षण दिखने के बाद तुरंत उसकी पहचान करें और घर पर सावधानी बरतने के साथ ही इस तरह का कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.

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