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कà¥à¤¯à¤¾ है चमकी बà¥à¤–ार? लकà¥à¤·à¤£
चमकी बà¥à¤–ार में वासà¥à¤¤à¤µ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के खून में सà¥à¤—र और सोडियम की कमी हो जाती है. सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो सकती है.​
मीठी लीची के लिठपà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ बिहार का मà¥à¤œà¤«à¥à¤«à¤°à¤ªà¥à¤° इन दिनों कà¥à¤› और वजह से समाचारों में है. इस साल मà¥à¤œà¤«à¥à¤«à¤°à¤ªà¥à¤° में चमकी बà¥à¤–ार से अब तक 100 बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का निधन हो चà¥à¤•ा है. साल 1995 से ही यह रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯ बीमारी यहां के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को अपना शिकार बनाती आई है. पिछले दो दशक में à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट इंसेफेलाइटिस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® की वजह से देश में 5000 से अधिक बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ की मौत हो चà¥à¤•ी है.
हर साल मई और जून के महीने में बिहार के अलग-अलग कसà¥à¤¬à¥‡ के बचà¥à¤šà¥‡ इस बीमारी की चपेट में आते हैं और बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के मरने का सिलसिला शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है. बिहार सरकार के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ विà¤à¤¾à¤— की लापरवाही और डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की असंवेदनशीलता ने पीड़ित बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के परिजनों को और परेशान किया है. 1 से 15 साल की उमà¥à¤° के बचà¥â€à¤šà¥‡ इस बीमारी से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते हैं
चमकी बà¥à¤–ार वासà¥à¤¤à¤µ में à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट इंसेफेलाइटिस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® (à¤à¤ˆà¤à¤¸ ) है. इसे दिमागी बà¥à¤–ार à¤à¥€ कहा जाता है. यह इतनी खतरनाक और रहसà¥à¤¯à¤®à¤¯à¥€ बीमारी है कि अà¤à¥€ तक विशेषजà¥à¤ž à¤à¥€ इसकी सही-सही वजह का पता नहीं लगा पाठहैं. चमकी बà¥à¤–ार में वासà¥à¤¤à¤µ में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के खून में सà¥à¤—र और सोडियम की कमी हो जाती है. सही समय पर उचित इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो सकती है.गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में तेज धूप और पसीना बहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इस वजह से डिहाइडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨, लो बà¥à¤²à¤¡ पà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤°, सिरदरà¥à¤¦, थकान, लकवा, मिरà¥à¤—ी, à¤à¥‚ख में कमी जैसे लकà¥à¤·à¤£ महसूस हो सकते हैं. चमकी बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥€ à¤à¤¸à¥‡ ही हैं.
यह बीमारी शरीर के मà¥à¤–à¥à¤¯ नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤® या तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करती है. बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤®à¥€ à¤à¤µà¤‚ नमी के मौसम में à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट इंसेफेलाइटिस सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® के फैलने की रफà¥à¤¤à¤¾à¤° बॠजाती है. इस मौसम में इसकी तीवà¥à¤°à¤¤à¤¾ à¤à¥€ काफी बॠजाती है.कैसे काम करते हैं चमकी बà¥à¤–ार के वायरस?
इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ वासà¥à¤¤à¤µ में मानव मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• से जà¥à¤¡à¤¼à¥€ बीमारी है. हमारे मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में लाखों कोशिकाà¤à¤‚ और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ होती हैं. इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं. जब इन कोशिकाओं में सूजन या कोई अनà¥à¤¯ दिकà¥à¤•त आ जाती है, तो इसे ही à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® कहते हैं.
यह à¤à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है. चमकी बà¥à¤–ार के वायरस जब शरीर में पहà¥à¤‚चते हैं और खून में शामिल हो जाते हैं, तो इनका पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ शà¥à¤°à¥‚ हो जाता है. इसके बाद इनकी संखà¥à¤¯à¤¾ तेजी से बढ़ने लगती है.
खून के साथ बहकर बीमारी ये वायरस मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• तक पहà¥à¤‚च जाते हैं. मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• में पहà¥à¤‚चने पर ये वायरस कोशिकाओं में सूजन का कारण बनते हैं और शरीर के 'सेंटà¥à¤°à¤² नरà¥à¤µà¤¸ सिसà¥à¤Ÿà¤®' को खराब कर देते हैं.कà¥à¤¯à¤¾ हैं चमकी बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£?
चमकी नाम की बीमारी में शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में तेज बà¥à¤–ार आता है.
इसके बाद बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के शरीर में à¤à¤‚ठन शà¥à¤°à¥‚ हो जाती है.
इसके बाद तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ा तंतà¥à¤° काम करना बंद कर देता है.
इस बीमारी में बà¥à¤²à¤¡ शà¥à¤—र लो हो जाता है.
बचà¥à¤šà¥‡ तेज बà¥à¤–ार की वजह से बेहोश हो जाते हैं और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दौरे à¤à¥€ पड़ने लगते हैं.
जबड़े और दांत कड़े हो जाते हैं.
बà¥à¤–ार के साथ ही घबराहट à¤à¥€ शà¥à¤°à¥‚ होती है और कई बार कोमा में जाने की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ à¤à¥€ बन जाती है.
अगर बà¥à¤–ार के पीड़ित को सही वकà¥à¤¤ पर इलाज नहीं मिलता है तो मौत तय है.
अगर चमकी बà¥à¤–ार हो जाठतो कà¥à¤¯à¤¾ करें?
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पानी पिलाते रहे, इससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ रहने और बीमारियों से बचने में मदद मिलेगी.
तेज बà¥à¤–ार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछें.
पंखे से हवा करें या माथे पर गीले कपड़े की पटà¥à¤Ÿà¥€ लगायें ताकि बà¥à¤–ार कम हो सके.
बचà¥â€à¤šà¥‡ के शरीर से कपड़े हटा लें à¤à¤µà¤‚ उसकी गरà¥à¤¦à¤¨ सीधी रखें.
बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को पारासिटामोल की गोली व अनà¥â€à¤¯ सीरप डॉकà¥â€à¤Ÿà¤° की सलाह के बाद ही दें.
अगर बचà¥à¤šà¥‡ के मà¥à¤‚ह से लार या à¤à¤¾à¤— निकल रहा है तो उसे साफ कपड़े से पोछें, जिससे सांस लेने में दिकà¥â€à¤•त न हो.
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को लगातार ओआरà¤à¤¸ का घोल पिलाते रहें.
तेज रोशनी से बचाने के लिठमरीज की आंख को पटà¥à¤Ÿà¥€ से ढंक दें.
बेहोशी व दौरे आने की अवसà¥â€à¤¥à¤¾ में मरीज को हवादार जगह पर लिटाà¤à¤‚.
चमकी बà¥à¤–ार की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में मरीज को बाà¤à¤‚ या दाà¤à¤‚ करवट लिटाकर डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास ले जाà¤à¤‚.
अगर आपके बचà¥à¤šà¥‡ में चमकी बीमारी के लकà¥à¤·à¤£ दिखें तो
सबसे पहले बचà¥à¤šà¥‡ को धूप में जाने से रोकें.
बचà¥à¤šà¤¾ तेज धूप के संपरà¥à¤• में आया तो उसे डिहाईडà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ की समसà¥à¤¯à¤¾ होगी, जिससे बीमारी की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ बà¥à¤¤à¥€ है.
बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को दिन में दो बार सà¥â€à¤¨à¤¾à¤¨ कराà¤à¤‚.
गरà¥à¤®à¥€ के समय बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को ओआरà¤à¤¸ अथवा नींबू-पानी-चीनी का घोल पिलाà¤à¤‚.
रात में बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को à¤à¤°à¤ªà¥‡à¤Ÿ खाना खिलाकर ही सà¥à¤²à¤¾à¤à¤‚.
चीनी-नमक का घोल, छाछ, शिकंजी के अलावा तरबूज, खरबूज, खीरे जैसी चीजों का खूब सेवन करें.
इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ à¤à¤• संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• बीमारी है, जो à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में आसानी से फैल सकती है. किसी वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के इस बीमारी के संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ हो जाने के बाद उसके मल-मूतà¥à¤°, थूक, छींक आदि (शरीर से निकलने वाले तरल पदारà¥à¤¥) के संपरà¥à¤• में आने से दूसरे वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ में à¤à¥€ इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ के वायरस पहà¥à¤‚च सकते हैं.
इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ का ही à¤à¤• रूप है जापानी बà¥à¤–ार, जो मचà¥à¤›à¤°à¥‹à¤‚ के कारण फैलता है. à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट इंसेफà¥à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® से बचाव के लिठआपको अपने घर के आसपास सफाई रखनी चाहिà¤.
चमकी बà¥à¤–ार के लकà¥à¤·à¤£ दिखने के बाद तà¥à¤°à¤‚त उसकी पहचान करें और घर पर सावधानी बरतने के साथ ही इस तरह का कोई à¤à¥€ लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर तà¥à¤°à¤‚त डॉकà¥à¤Ÿà¤° के पास जाà¤à¤‚.
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